अध्याय 214

समर की नज़र से

मिया और मैं हाथों में हाथ डाले दर्शकों की तरफ झुककर सलाम कर रहे थे। मंच के किनारों से कैमरों की फ्लैश चमक रही थीं। मुस्कुराते-मुस्कुराते मेरे गाल दुख रहे थे, मगर इस बार मेरी मुस्कान सच थी। हमने कर दिखाया था। सच में कर दिखाया था।

मैं मुड़कर बैकस्टेज की ओर जाने ही वाली थी कि किसी ...

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